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अब हरियाणा में ग्राम पंचायतें करेंगी अपनी पेयजल आपूर्ति का रखरखाव

जितने बिल पंचायत इकट्ठा करेगी उतनी ही राशि सरकार भी देगी

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Water Supply in Villages : हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। जल जीवन मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप, हरियाणा कैबिनेट की बैठक में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति के लिए नई O&M (ऑपरेशन एवं रखरखाव) नीति को मंजूरी दी गई है। यह नीति सहभागी और टिकाऊ शासन मॉडल पर आधारित है, जिसमें “सरकार-समुदाय भागीदारी”(GCP) को बढ़ावा दिया गया है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी के अनुसार ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित करने के लिए भी निर्णय लिया गया है। इस फैसले के अनुसार जितना जल शुल्क ग्राम पंचायत एकत्र करेंगी, उतनी ही अतिरिक्त राशि प्रदेश सरकार द्वारा दी जाएगी। इससे पंचायतों की वितीय क्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा के कुल 6 हजार 721 गांवों को 3 श्रेणियों में विभाजित किया गया है। जिनमें सिंगल पंचायत मेंटेनेंस योजना, मल्टीपल पंचायत मेंटेनेंस योजना और महाग्राम योजना शामिल है। 4583 गांव सिंगल पंचायत श्रेणी में आते हैं, जबकि 2138 गांव अन्य श्रेणियों में शामिल हैं। सिंगल पंचायत वाले गांवों में यह पॉलिसी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। मल्टीपल पंचायत और महाग्राम श्रेणी में इसे 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जाएगा।

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पिछले काफी समय से हरियाणा में पानी के बिलों को लेकर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और ग्रामीणों के बीच विवाद चल रहा था। ग्रामीणों को कहना था कि उनके यहां जलापूर्ति की लाइन तक नहीं बिछी है लेकिन इसके बावजूद उन्हें पानी के बिल भेजे जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि उसके इस फैसले से यह समस्या भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। सरकार ने इस मामले में पंचायत को अधिक से अधिक बिल संग्रहित करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से इसमें यह जोड़ा है कि जितने बिल इकट्ठा किए जाएंगे उतनी ही राशि सरकार भी पंचायत को देने का काम करेगी।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू में यह कार्य सिंगल पंचायत वाले ग्रामों में शुरू हो रहा है। 1 साल में इनका अध्ययन करने के बाद मल्टीपल पंचायत और महाग्राम योजना में शामिल गांवों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

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